डॉ ज्ञानादित्य शाक्य की किताब ह्यूमन वेल्यूस एंड बुद्धिस्ट एथिक्स एवं नामचारदीपक का लोकार्पण

डॉ ज्ञानादित्य शाक्य की किताब ह्यूमन वेल्यूस एंड बुद्धिस्ट एथिक्स एवं नामचारदीपक का लोकार्पण

डॉ- ज्ञानादित्य शाक्य द्वारा विरचित Human Values and Buddhist Ethics (ह्यूमन वेल्यूस एंड बुद्धिस्ट एथिक्स) एवं नामचारदीपक का लोकार्पण

‘भगवान बु़द्ध के करुणामय सन्देश’ नामक विषय पर बेविनार

संवाददाता. कुशीनगर. 
आधुनिक भारत के बौद्ध धर्म के महान पुनरुद्धारक त्रिपिटकाचार्य डॉ• भिक्षु धर्मरक्षित की पुण्यतिथि (निर्वाण दिवस) के अवसर पर पालि सोसायटी ऑफ इण्डिया द्वारा लुम्बिनी बौद्ध विश्वविद्यालय, लुम्बिनी (नेपाल) एवं सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी के संयुक्त तत्वावधान में ‘भगवान बु़द्ध के करुणामय सन्देश’ नामक विषय पर 23 एवं 24 मई 2020 को आयोजित 11वें पालि दिवस (द्विदिवसीय अर्न्तराष्ट्रीय वेबिनार) में राष्ट्रपति पुरस्कार एवं विविध पुरस्कार से सम्मानित डॉ- ज्ञानादित्य शाक्य द्वारा विरचित ह्यूमन वेल्यूस एंड बुद्धिस्ट एथिक्स एवं नामचारदीपक नामक दो पुस्तकों का लोकार्पण किया गया।
इन ग्रन्थों का विमोचन प्रो- हृदय रतन बज्राचार्य (कुलपति, लुम्बिनी बौद्ध विश्वविद्यालय, लुम्बिनी, नेपाल), प्रो- राजाराम शुक्ला (कुलपति, सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी), प्रो- रमेश प्रसाद (सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी), डॉ- भिक्खु नन्दरतन थेरो (सचिव, पालि सोसायटी ऑफ इण्डिया तथा समन्वयक, 11वाँ पालि दिवस), प्रो- हर प्रसाद दीक्षित (सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी), प्रो- विजय कुमार जैन (निदेशक, केन्द्रीय संस्कृत संस्थान, लखनऊ), प्रो- भिक्षु संकिच्च महाथेरो (लुम्बिनी विश्वविद्यालय, लुम्बिनी, नेपाल), प्रो- रामनक्षत्र प्रसाद (नव नालन्दा महाविहार, नालन्दा), प्रो- आनन्द सिंह (नालन्दा विश्वविद्यालय, राजगिरि, नालन्दा), प्रो- सी- उपेन्द्र राव (जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली), प्रो- राम नन्दन सिंह (केन्द्रीय संस्कृत संस्थान, लखनऊ), प्रो- बिमलेन्द्र कुमार (काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी), प्रो- अरविन्द आलोक (बुद्धिस्ट मौन्यूमेन्ट डिवलपमैन्ट काउसिंल, नई दिल्ली), भिक्षु मैत्री महाथेरो (चेयरमैन, अखिल नेपाल भिक्षु संघ, लुम्बिनी, नेपाल), डॉ- रमेशचन्द्र नेगी (केन्द्रीय तिब्बती अध्ययन विश्वविद्यालय, सारनाथ), डॉ- भिक्खु तेजवरो थेरो (गोल्डन माउण्टेन टेम्पल, ताईवान), भिक्षु ज्ञानालोक स्थविर (बुद्ध विहार महाबोधि सोसाइटी ऑफ इण्डिया, रिसालदार पार्क, लखनऊ), डॉ- भिक्षु धर्मप्रिय स्थविर (महाबोधि इण्टर कालेज, सारनाथ), अनगारिका प्रीतीवती (थेरवाद बुद्धिस्ट अकादमी, काठमाण्डू, नेपाल), डॉ- ग्योर्मित दोर्जे (निदेशक, केन्द्रीय हिमालयन संस्कृति संस्थान, अरुणाचल प्रदेश), म्यानमार निवासी डॉ- सॉ थु सन्था (स्वामी विवेकानन्द सुभारती विश्वविद्यालय, मेरठ), डॉ- रीना तुलाधार (त्रिभुवन विश्वविद्यालय, नेपाल), डॉ- उज्ज्वल कुमार (कलकत्ता विश्वविद्यालय, कलकत्ता), डॉ- सुरजीत कुमार सिंह (महात्मा गाँधी अन्तर्राष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय, वर्धा), डॉ- प्रफुल्ल गडपाल (केन्द्रीय संस्कृत संस्थान, लखनऊ), डॉ- नीरज बोधि (राष्ट्रसन्त तुकडोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय, नागपुर), डॉ- तलअत प्रवीन (साबित्रीबाई फूले पूणे विश्वविद्यालय, पुणे), श्री फानिन्द्र कुमार न्यूपाने (लुम्बिनी विश्वविद्यालय, लुम्बिनी, नेपाल) एवं डॉ- अनिमेष प्रकाश (केन्द्रीय तिब्बती अध्ययन विश्वविद्यालय, सारनाथ) की गरिमामयी उपस्थिति में किया गया।
संज्ञान प्रकाशन, नागपुर ने ह्यूमन वेल्यूस एंड बुद्धिस्ट एथिक्स को सन् 2020 में प्रकाशित किया है। इसमें फारवर्ड राष्ट्रपति सम्मानित प्रो- भिक्षु सत्यपाल महास्थविर ने लिखा है तथा यह पुस्तक श्रीमती विभा शाक्य को समर्पित की गयी है। डॉ- भिक्खु नन्दरतन थेरो (सचिव, पालि सोसायटी ऑफ इण्डिया) ने नामचारदीपक को सन् 2020 में प्रकाशित किया है। इसमें राष्ट्रपति सम्मानित प्रो- रमेश प्रसाद ने पुरोवाक् लिखा है तथा यह पुस्तक डॉ- भिक्षु धम्मपाल स्थविर को समर्पित की गयी है। इस सफलता के लिए संज्ञान प्रकाशन, नागपुर के मालिक श्री संजय स्वदेश ने डॉ- शाक्य को बधाई दी। इसके लिए परिवार के सदस्यों, पालि एवं बौद्ध अध्ययन के विद्वज्जनों, पाठकों, शोधार्थियों ने ग्रन्थों की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए डॉ- शाक्य को बधाई दी तथा पालि व बौद्ध साहित्य के विकास में योगदान देते रहने की शुभेच्छा व्यक्त की।

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