छत्तीसगढ़ में खुले एक बौद्ध विश्वविद्यालय : डॉ. सुरजीत

छत्तीसगढ़ में खुले एक बौद्ध विश्वविद्यालय : डॉ. सुरजीत


संवाददाता, रायपुर. आदिवासी अस्मिता : कल आज और कल विषय पर रायपुर में आयोजित तीन दिवसीय राष्‍ट्रीय शोध संगोष्‍ठी में महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विवि वर्धा के बौद्व अध्‍ययन केंद्र के प्रभारी निदेशक डॉ सुरजीत कुमार सिंह ने कहा कि छत्तीसगढ़ के सभी विश्वविद्यालयों और राजकीय महाविद्यालयों में आदिवासी अध्ययन विभाग, केंद्र खुलने चाहिए. छत्तीसगढ़ की प्रमुख आदिवासी भाषाओं के विभाग भी खुलने चाहिए और इनकी नियुक्तियों में 50 प्रतिशत से अधिक आदिवासी समाज के ही विद्वानों एवं अध्येताओं को ही भर्ती किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में सिरपुर बौद्ध पुरातत्व महत्व का स्थल भी है, जो कि प्राचीन नालन्दा विश्वविद्यालय जैसा ही था. इसी सिरपुर में प्रसिद्ध चीनी यात्री ह्वेनसांग भी आए थे, इसलिए यहाँ एक बौद्ध विश्वविद्यालय की स्थापना भी की जानी चाहिए, ताकि यह स्थल विश्व पटल पर और प्रसिद्धि के साथ उभर सके, साथ ही इससे छत्तीसगढ़ के पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा.
डॉ सुरजीत ने कहा कि आदिवासियों की जनसंख्‍या पूरे भारत में 8 से 10 प्रतिशत है लेकिन उनका प्रतिनिधित्‍व कहीं नजर नहीं आता है. छत्‍तीसगढ़ में आदिवासियों की आबादी 32 प्रतिशत और यहां भी आदिवासी नहीं दिखते हैं. आदिवासी दिखते हैं दूर दराज के दुर्गम इलाकों में और छत्‍तीसगढ़ के रायपुर, बिलासपुर जैसे महानगरों में आदिवासी मुख्‍यधारा से दूर ही हैं. जबकि छत्‍तीसगढ़ का हर तीसरा आदमी जनसंख्‍या के अनुसार आदिवासी है. डॉ. सिंह ने कहा कि ये कहा जाता है आदिवासियों के राजे महाराजे हुए हैं और गोंडवाना में तो आदिवासियों का शासन था, लेकिन कोई दूरदृष्टि न होने के कारण आदिवासियों को शोषण रुक नहीं पाया, बल्कि वे और अधिक अत्‍याचार बढ़ता चला गया. क्‍योंकि जो कौम शासन करती है उसका शोषण नहीं होता है. लेकिन आदिवासियों के मामले में उल्टा हुआ है. जबकि ब्रिटिश मुट्ठीभर थे लेकिन उन्‍होंने पूरी दुनिया पर शासन किया उनका कभी भी शोषण नहीं हुआ. आज आदिवासियों के अस्मिता के साथ सबसे बड़ा खिलवाड़ किया जा रहा है. इस सत्र का संचालन डॉ नरेश कुमार साहू ने किया, गणेश सोनकर, जितेंद्र सोनकर और रमेश ठाकुर ने स्वागत किया.

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