शासन के फरमान के बाद छोड़ी मलाईदार कुर्सी, घोटालों पर कार्रवाई ठंडे बस्ते में

शासन के फरमान के बाद छोड़ी मलाईदार कुर्सी, घोटालों पर कार्रवाई ठंडे बस्ते में

रायपुर. तबादलों के बावजूद पुरानी मलाईदार पदस्थापना से मुक्त होने में दिलचस्पी नहीं दिखाने वाले अफसरों को आखिरकार कुर्सी छोड़नी पड़ी. तबादला नीति के तहत राज्य शासन के दिशा-निर्देशों के बावजूद कुर्सी नहीं छोड़ने वाले अफसरों को राज्य शासन की चेतावनी के बाद जाना पड़ गया. जल संसाधन विभाग में आनन-फानन में अफसर कार्यमुक्त किए गए. इधर, स्थानांतरण के बाद दागी अफसरों को फिर से फील्ड में नई जवाबदारी दे दी गई है. वहीं निर्माण में भ्रष्टाचार के दोषी अफसरों के खिलाफ कार्रवाई भी ठंडे बस्ते में डाल दी गई है. तबादलों के बाद नई पदस्थापना के बाद भी मलाईदार कुर्सी नहीं छोड़ने वालों को राज्य शासन की चेतावनी के बाद रिलीव होना पड़ गया. जल संसाधन विभाग में एक ही कुर्सी पर लंबे समय से जमे कुछ अफसरों को नई पदस्थापना में जॉइनिंग का दबाव था. हालांकि विभाग में कई दागी अफसरों पर कार्रवाई और अटैच करने के बजाय फिर से फील्ड में जिम्मेदारी दे दी गई है. वहीं निर्माण में भ्रष्टाचार की जांच में दोषी पाए गए अफसर भी वहीं पदस्थ हैं. ऐसे कई अफसर स्थानांतरण से अछूते रहे हैं. इसे लेकर भी विभाग में अंदरूनी खींचतान शुरू हो गई है. विभाग के बड़े घोटालों में लिप्त अफसरों के रसूख की वजह से कोई कार्रवाई नहीं हो पाई, उन्हें फिर से फील्ड में भेजकर नई जवाबदारी दे दी गई है. कोडार बांध सुरक्षा कार्य में 1 करोड़ 71 लाख के फर्जी भुगतान कर भ्रष्टाचार करने वाले दोषी कार्यपालन अभियंता समेत निचले अफसरों को विभाग ने अभयदान दे दिया. इसी तरह महासमुंद जिले के दो बड़े साजापाली एवं भुरकोनी एनीकट में भ्रष्टाचार के दोषी अनुविभागीय अधिकारी एवं उपअभियंता अभी भी वहीं जमे हुए हैं.  कोडार बांध सुरक्षा कार्य में भ्रष्टाचार के अलावा भुरकोनी एवं बड़े साजापाली एनीकट में भ्रष्टाचार के दोषियों के खिलाफ कार्रवाई का दबाव बढ़ गया है. सूत्रों के मुताबिक विभाग में ही अफसरों के एक धड़े ने भ्रष्टाचारियों के खिलाफ दस्तावेजी पुलिंदा सीधे ईओडब्ल्यू को सौंपने की तैयारी कर ली है. विभाग ने रसूख के चलते अफसरों की जांच रिपोर्ट दबाकर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया.

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