स्वच्छता अभियान : ज्यादा कचरा निकालने वालों की दिक्कतें बढ़ेंगी

स्वच्छता अभियान : ज्यादा कचरा निकालने वालों की दिक्कतें बढ़ेंगी

रायपुर. ऐसे स्थान या प्रतिष्ठान जहां प्रतिदिन भारी मात्रा में कचरा निकलता है, वहां के प्रबंधन की दिक्कतें अब बढ़ेंगी. उन्हें परिसर में ही बल्क वेस्ट जनरेटर के जरिए कचरे का निपटारा करना होगा या फिर नगरीय निकाय उनसे भारी टैक्स वसूल करेंगे.  जाहिर है कि शहरी इलाकों में ऐसे बहुत सी कॉलोनियां, छात्रावास, शैक्षणिक संस्थाएं, कंपनियां, अस्पताल, नर्सिंग होम, होटल आदि हैं, जहां हर दिन कई टन कचरा निकलता है. ये कचरा सार्वजनिक मुक्कड़ों में फेंकवा दिया जाता है. स्वच्छता अभियान के तहत जो नए नियम बने हैं, उसके लागू होने के बाद ऐसा करना संभव नहीं होगा. साफ-सफाई की व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए शासन ने कुछ अहम फैसले लिए हैं. दरअसल, शासन भी ये मानता है कि शहरों को स्वच्छ रखना अकेले निकायों के बस की बात नहीं है, इस अभियान में आम लोगों की भागीदारी भी जरूरी है. नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने प्रदेश के निकायों को इस मामले में कुछ नए दिशा-निर्देश दिए हैं. जिसके मुताबिक जहां भी प्रतिदिन औसत 100 किलो कचरा एकत्र होता है, वहां परिसर में ही कचरे के निपटाने का प्रावधान रखा गया है. निकायों को इस मामले में स्वच्छता सर्वे में अंक मिलेगा. निकायों का काम ऐसे स्थानों की पहचान कर सूची तैयार करना और वहां कचरे के निपटारे की व्यवस्था करवाना है. मिशन क्लीन सिटी के तहत किए गए सर्वे के आधार पर ऐसे प्रतिष्ठानों की सूची तैयार की जाएगी. संबंधित प्रतिष्ठान यदि परिसर में ही कचरे का निपटारा नहीं करते हैं तो उन्हें खुद के खर्च से कचरा एसएलआरएम सेंटर(कचरा एकत्रीकरण केंद्र) तक पहुंचवाना होगा.   शासन ने तय किया है कि परिसर में ही कचरे का निपटारा करने वाले प्रतिष्ठानों या संस्थानों को टैक्स में 80 प्रतिशत तक की छूट दी जाएगी. लेकिन कम्पोस्ट संयंत्र बंद कर दिया जाता है तो जुर्माना राशि वसूल की जाएगी. कचरा परिवहन करवाने वाले संस्थाओं और प्रतिष्ठानों को टैक्स में 40 फीसदी तक की छूट का प्रावधान रखा गया है.

Please follow & like us:

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.