चुनावी मिशन मोड में कांग्रेस, एक विधानसभा से 3-3 दावेदारों का पैनल की रणनीति

चुनावी मिशन मोड में कांग्रेस, एक विधानसभा से 3-3 दावेदारों का पैनल की रणनीति

रायपुर. चुनावी मिशन की रणनीतियों के बीच कांग्रेस ने सभी विधानसभा क्षेत्रों मंे दावेदारों को टटोलना शुरू कर दिया है. संगठन में पहली बार काडर तैयार करने के साथ हर विधानसभा क्षेत्र से तीन दावेदारों का पैनल तैयार हो रहा है. संगठन की ओर से सेक्टर प्रभारियों के जरिए यह नाम लिए जा रहे हैं. अब तक करीब 45 सीटों पर सक्रिय दावेदारों का पैनल बन चुका है. हालांकि यह अंतिम नहीं है, इसके बावजूद शुरूआती कसरत से कांग्रेस में निचले स्तर पर सक्रियता के साथ उठापटक बढ़ गई है.
प्रत्याशी चयन को लेकर कांग्रेस संगठन में निचले स्तर पर प्रयास शुरू हो गए हैं. पीसीसी ने अपनी शुरूआती तैयारियों को गोपनीय ढंग से आगे बढ़ा दिया है. दरअसल, प्रदेश में विधानसभावार प्रशिक्षण का दौर जारी है. हर विधानसभा क्षेत्र के अलग-अलग सेक्टर प्रभारियों से संगठन ने प्राथमिकता के आधार पर बाकायदा वहां के तीन योग्य दावेदारों के नाम मांगे हैं. निर्धारित प्रोफार्मा में यह पूछा गया है कि संबंधित विधानसभा क्षेत्र से किसे प्रत्याशी बनाया जाना उचित होगा. वहीं बीते चुनाव में हार या जीत की वजह क्या रही है. एक विधानसभा क्षेत्र में ही मतदान केन्द्रों की संख्या के हिसाब से करीब 50 से 70 सेक्टर प्रभारी हैं. सूत्र दावा करते हैं कि सेक्टर प्रभारियों की अनुशंसाओं में बहुमत के आधार पर दावेदारों के नाम को रिजर्व रखा जाएगा. यह फिलहाल संगठन के स्तर की कवायद है. प्रत्याशी चयन से पहले इस पैनल को खुद पीसीसी की ओर से सुप्रीम बाडी के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा. हालांकि यह भी तय है कि अंतिम दौर में परिस्थितियां बदल सकती हैं, इसके बावजूद संगठन का जोर अपनी तरफ से तैयार किए गए पैनल में से किसी एक नाम पर मुहर लगाने पर होगा. चुनाव के दौरान कांग्रेस की प्रत्याशी चयन समिति की हरी झंडी मिली तो संगठन की ओर से तय किए गए प्रत्याशी ही मैदान में होंगे.
कार्यकर्ताओं से पूछ का टिकट
प्रदेश कांग्रेस ने इस बार स्थानीय कार्यकर्ताओं से पूछकर टिकट तय करने पर जोर दिया है. इसे लेकर बनाए गए फार्मूले का पहला पड़ाव माना जा रहा है. खुद प्रदेश अध्यक्ष एवं नेता प्रतिपक्ष कार्यकर्ताओं की पसंद पर टिकट तय करने का एलान कर चुके हैं.  एक विधानसभा क्षेत्र में 50 से 70 सेक्टर प्रभारी होने की वजह से वे पक्षपात नहीं कर पाएंगे. सेक्टर प्रभारियों ने अगर खुद के नाम की अनुशंसा की तो सभी प्रभारियों के प्रोफार्मा में बहुमत का आकलन होगा. ऐसी स्थिति में वे पक्षपात नहीं कर पाएंगे.

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