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तीन राज्यों में किसानों को तबाह कर रही है सफेद मक्खी!

बठिंडा. ए. पिछले साल की तरह इस बार नरमा कपास पर हमला करने वाली सफेद मक्खी का मिलकर सफाया करने के लिए मुहिम चलाने को लेकर आज यहां राजस्थान, पंजाब और हरियाणा के कृषि अधिकारियों की अहम बैठक हुई. इन मक्खियों के प्रकोप में किसानों का भारी नुकसान हो रहा है. वे परेशान हैं. फसलों के नुकसान से उनकी आर्थिक हालत पतली होने लगी है. पंजाब के बठिंडा में उपायुक्त कार्यालय में हुई जिसमें पड़ोसी राज्य राजस्थान, पंजाब और हरियाणा के कृषि अधिकारियों कीबैठक हुई. इसमें तीनों राज्यों ने सफेद मक्खी के एक साथ सफाये को लेकर विचार-विमर्श किया गया ताकि क्षेत्र से ही इस कीड़े का खात्मा किया जा सके. अब तक पंजाब में छिड़काव होने पर कीड़ा हरियाणा और हरियाणा से राजस्थान चला जाता है. एक साथ दवा छिड़कने से इन कीडों के सफाये की उम्मीद है. इससे कपास पर हमले की संभावना खत्म हो जायेगी. इसके अलावा अधिकारियों ने नकली कीटनाशक दवा बेचने वालों पर काबू पाने तथा सेंपल भरने को लेकर भी चर्चा हुई. गौरतलब है कि पंजाब के मालवा क्षेत्र में सफेद मक्खी के हमले से कपास की फसल को नुकसान हुआ है और समय पर यदि ठोस कदम नहीं उठाया गया तो सारी फसल तबाह हो जाएगी जिसके बाद किसानों द्वारा आत्महत्या तक किये जाने की आशंका व्यक्त की जा रही है. किसानों की बढ़ती आत्महत्याओं को लेकर तथा मालवा में सफेद मक्खी के हमले का मौके पर जायजा लेने मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह कल दो गांवों के खेतोंं में गये और किसानों को मदद का आश्वासन दिया. उन्होंने किसानों से आग्रह किया कि वे आत्महत्या का रास्ता न अपनाकर सरकार पर भरोसा रखें. सरकार कर्ज का ठोस हल निकालने का प्रयास कर रही है.
क्या होती है सफेद मक्खी
जिस भी पत्ते पर सफेद मक्खी का पेशाब पड़ता है, वह पत्ता काला पड़ जाता है.सफेद मक्खी के पेशाब में शुगर बहुत ज्यादा होती है. कीटों की सबसे खास बात यह होती है कि यदि कीट को यह अहसास हो जाता है कि उस पर हमला होने वाला है तो वह अपने जीवन को छोटा करके अपने बच्चे पैदा करने कर क्षमता को बढ़ा लेता है. सफेद मक्खी एक ऐसा कीट है जो बिना नर के भी अंडे दे देती है. सफेद मक्खी एक ऐसा कीट है जो 600 से भी ज्यादा पौधों पर आती है. इसके बच्चे पानी की बूंद की तरह दिखाई देते हैं और वह पत्ते पर एक जगह पड़े-पड़े ही रस चूसते रहते हैं. यदि मौसम अनुकूल हो तो सफेद मक्खी के अंडे से तीन-चार दिन में बच्चा निकल आता है यदि मौसम अनुकूल नहीं हो तो अंडे से बच्चा निकलने में 15 से 20 दिन भी लग जाते हैं.
इस तरह होती है खतरनाक
कीटों की सबसे खास बात यह होती है कि यदि कीट को यह अहसास हो जाता है कि उस पर हमला होने वाला है तो वह अपने जीवन को छोटा करके अपने बच्चे पैदा करने कर क्षमता को बढ़ा लेता है. फसल में सफेद मक्खी का प्रकोप होने पर पत्ते के नीचे की नसें फुल जाती हैं और पत्ते का रंग गहरा हरा हो जाता है. पत्ता प्रकोपित होकर ऊपर की तरफ कटोरे की भांति मुडऩे लग जाता है. उन्होंने बताया कि यह कीट मरोडिय़ा नामक वायरस को फैलाने में सहायक है. जब सफेद मक्खी एक पत्ते से रस चूकर दूसरे पत्ते पर रस चूसने के लिए जाती है तो उसके थूक के माध्यम से मरोडिय़े का वायरस दूसरे पौधे तक पहुंच जाता है. जब फसल में मरोडिय़ा बढ़ जाता है तो पौधा प्रकोपित पत्ते के नीचे एक ओर नया पत्ता निकाल लेता है. क्योंकि पौधे को पता होता है कि मुड़ा हुआ पत्ता अब भोजन नहीं बना पाएगा.
अंकुर फूटते ही हमला
हरियाणा , मध्यप्रदेश और पंजाब आदि राज्यों में अंकुर फूटते ही कपास पर सफेद मक्खी का हमला हो रहा है, किसानों में सफेद मक्खी के हमले को लेकर इतनी दहशत पैदा हो चुकी है कि वह अपने खेतों में कपास छोड़कर अन्य फसलें बीजने लगे हैं. कई किसानों ने कपास अपने खेतों में लगा ली थी, लेकिन जैसे ही उन्हें फसल पर सफेद मक्खी का हमला होता दिखाई दिया तो उन्होंने तुरंत इसको तुरंत ट्रैक्टर से रौंद दिया. कृषि विभाग की ओर से अधिकारिक की गई दवाओं को ही अपने खेतों में बोई कपास की फसल पर छिड़काव किया था, लेकिनअंदर उसकी फसल पर फिर से सफेद मक्खी ने हमला कर दिया. उस पर उक्त दवा का भी काई असर नहीं हुआ.

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