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इंसान में धड़केगा सूअर का दिल

मैसेच्यूसेट्स. ए. अमेरिका के मैसेच्यूसेट्स शहर में वैज्ञानिक सूअरों के ऐसे अंग विकसित करने की कोशिश कर रहे हैं जो सुरक्षित तरीके से मानव शरीर में ट्रांसप्लांट किए जा सकें. एक अध्ययन के मुताबिक वैज्ञानिकों इस प्रक्रिया में जीन एडिटिंग टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर रहे हैं. इस स्टडी के मुताबिक इस खोज से इंसान में सूअर के सभी अंग ट्रांसप्लांट कर सकने की संभावना बन सकती है. इसमें मरीज को सूअर से होने वाले रेट्रोवायरस का भी खतरा नहीं होगा.
सूअरों से ट्रांसप्लान किए गए अंग उन मरीजों के लिए जान बचा सकने वाला एक वैकल्पिक रास्ता बन सकते हैं, जिनके अंग खराब हो जाते हैं. मावन अंगों की उपलब्धता की कमी के चलते ही वैज्ञानिकों ने इस विकल्प की तलाश की कि क्या जानवरों में इस तरह के अंग विकसित कर इस अंतर को कम किया जा सकता है. यूनाइटेड नेटवर्क फॉर ऑर्गन शेयरिंग के मुताबिक अमेरिका में हर दिन लगभग 20 लोगों की मौत प्रत्यारोपण के लिए जरूरी अंग ने मिलने से होती है. इससे पहले भी अमेरिकी वैज्ञानिकों ने जीन एडिटिंग की मदद से इंसानी अंग बनाने में सफलता हासिल की थी.
कैलीफोर्निया यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों के मुताबिक सूअर के भ्रूण में इंसान की स्टेम सेल डालने पर इंसानी अंग विकसित होने लगता है. वैज्ञानिकों ने 28 दिन के विकास पर नजर रखने के बाद यह दावा किया था. सूअर बिल्कुल सामान्य लगता है लेकिन उसके भीतर एक इंसानी अंग काम करता है. काईमेरा भ्रूण में दो तरीके से बनाया जा सकता है. पहली तकनीक को जीन एडिटिंग कहा जाता है. इसमें सूअर के नए भ्रूण से असली डीएनए हटाकर इंसान का डीएनए डाला जाता है. ऐसा करते ही भ्रूण का विकास बदल जाता है. उसके भीतर इन्सानी पेंक्रियाज तैयार होने लगता है.
दूसरे तरीके में इंसान की प्लूरिपोटेंट स्टेम कोशिकाकों को भ्रूण में डाला जाता है. प्लूरिपोटेंट स्टेम सेल, वयस्क कोशिकाओं से निकाली जाती हैं. जीन एडिटिंग की मदद से इन्हें फिर से मूल स्टेम सेल बनाया जाता है. ऐसा करने पर ये शरीर के हर हिस्से के लिए ऊतक बना सकती हैं. वैज्ञानिकों का एक धड़ा मानता है कि भविष्य में जीन थैरेपी के जरिये ही अंग बदले जाएंगे. डायबिटीज, दिल के रोग, किडनी की बीमारी या दूसरे कारणों से अहम अंगों के खराब होने पर मरीज के शरीर में नए अंग डाले जाएंगे.

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Filed Under: विविध

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