रायपुर के युवाओं ने बनाई बाइक एम्बुलेंस, अरनपुर में मरीजों की करेगी सेवा

रायपुर के युवाओं ने बनाई बाइक एम्बुलेंस, अरनपुर में मरीजों की करेगी सेवा

खुद जुटाये पैसे, मरीजों को तकलीफ न हो इसके लिए शॉक अब्सॉर्बेर को मॉडिफाई
रायपुर/दंतेवाड़ा. रायपुर में एक इंजीनियरिंग कॉलेज के प्रोफेसर ने दुर्गम क्षेत्रों से मरीजों को अस्पताल तक लाने की कष्टसाध्य प्रक्रिया को आसान बनाने एक ऐसी बाइक बनाने की सोची जिसमें न्यूनतम जर्क के साथ मरीजों को लाया जा सके। इसके लिए शॉक अप में ऐसे परिवर्तन किये गए कि 45 किमी की स्पीड में भी मरीजों को जर्क महसूस न हो। उनको लिटाकर आसानी से अस्पताल तक लाया जा सके। बाइक के निर्माण के लिए तीनों प्रोफेसरों और उनके मित्रों ने पैसे जुटाये। अजय वर्मा ने बताया कि उड़ीसा में दाना मांझी के साथ घटी घटना ने उन्हें विचलित किया। फिर उन्होंने फ़ेसबुक पर टिप्पणी लिखी। टिप्पणी में प्रतिक्रिया में कुछ दोस्तों ने लिखा कि सिविल सोसाइटी के भी दायित्व होते हैं। सबके साथ काम करने पर ही लक्ष्य की प्राप्ति होती है। फिर इस बारे में अपने दोस्तों मिथिलेश, तरुण और प्रमोद से बातचीत की। तीनों ने साथ में इंजीनयिरिंग किया था। तीनों ने योजना बनाई कि ऐसी बाइक एम्बुलेंस बनाएंगे जो अब तक उपलब्ध बाइक एम्बुलेंस की तुलना में ज्यादा शॉक अब्सॉर्ब कर सके और इसमें अन्य सुविधा भी हो। फिर देश में उपलब्ध अन्य बाइक एम्बुलेन्स की स्टडी की। फिर 3 महीने लगे। इसमें 40 स्टूडेंट का सहयोग भी लिया जो ऑटोमोबाइल के विभिन्न मशीनों पर काम करते रहे। बाइक बनाने के बाद निर्णय लिया कि इसे बस्तर में सेवा के लिए भेजेंगे। फिर जिला प्रशासन से संपर्क किया गया।
जिला प्रशासन ने इसके संचालन की जिम्मेदारी शमयिता मठ को सौंपने का निर्णय किया। आज से यह बाइक अरनपुर क्षेत्र में काम करने लगी है। अरनपुर-पालनार रोड के आसपास बसे गांव एवं बसाहटों के लिए यह बाइक वरदान साबित होगी। इससे संस्थागत प्रसव को बढ़ाने में मदद मिलेगी साथ ही क्विक रिस्पांस टाइम भी बेहतर होगा। तरुण राजपूत ने बताया कि सबसे ज्यादा जरुरत वाले क्षेत्रों में हमारी बाइक एम्बुलेंस पहुँच पाएगी, यह सोचकर ही हमें बहुत ख़ुशी मिल रही है। हमारे साथ कार्य करने वाले 40 छात्र भी काफी उत्साहित हैं कि वे अपने हुनर का उपयोग इस तरह राष्ट्र निर्माण के लिए कर पा रहे हैं। मिथिलेश वर्मा ने तकनीकी पक्षों की जानकारी देते हुए बताया कि हमने शॉक अप में हेलिकल स्प्रिंग और लीफ स्प्रिंग लगाये। शॉक अप ऐसा है कि मरीज, अटेंडेंट और एक मेडिकल स्टाफ का वजन आसानी से सह सकता है और 45 किमी तक की स्पीड में बिना जर्क गाड़ी चला सकते हैं। प्रमोद निर्मलकर ने बताया कि बाइक एम्बुलेंस दंतेवाड़ा जैसी जगहों के लिए वरदान हैं जहाँ दुर्गम स्थलों में विरल बसाहटें हैं।

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