मौत की वजह दवाएं, मुझे फंसाया जा रहा : गुप्ता

मौत की वजह दवाएं, मुझे फंसाया जा रहा : गुप्ता

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में नसबंदी के बाद महिलाओं की मौत के मामले में गिरफ्तार चिकित्सक ने संदिग्ध गुणवत्ता वाली दवाइयों को इसके लिए जिम्मेदार ठहाराया है। चिकित्सक ने आरोप लगाया है कि उन्हें फंसाया जा रहा है। बिलासपुर जिले के पेंंडारी गांव में नसंबदी के बाद राज्य शासन ने चिकित्सक आर. के. गुप्ता समेत चार अधिकारियों को निलंबित कर दिया था तथा डाक्टर गुप्ता के खिलाफ मामला दर्ज कराया गया था। पुलिस ने आज चिकित्सक गुप्ता को गिरफ्तार कर लिया । गुप्ता ने 83 महिलाओं की नसबंदी की थी जिसमें से 12 महिलाओं की मौत हुई है। गुप्ता ने यहां संवाददाताओं से बातचीत के दौरान कहा कि नसंबदी के बाद महिलाओं को दर्द और एंटीबायटिक दवाईयां आईब्रुफेन और सिप्रोक्सिन दिया गया था। दवा लेने के बाद महिलाओं ने उल्टी और सिरदर्द की शिकायत की थी। इससे यह सामने आ रहा है कि महिलाओं की मौत संदिग्ध गुणवत्ता वाली दवाओं के कारण हुई है।
उन्होंने कहा कि वह लंबे समय से आपरेशन कर रहे हैं तथा इस दौरान उन्होंने हजारों महिलाओं की नसबंदी की है। लेकिन ऐसी घटना की जानकारी नहीं है। आपरेशन से पहले औजारों को पूरी तरह सुरक्षित कर लिया गया था। इसके बाद ही आपरेशन किया गया।
चिकित्सक ने कहा कि उन्हें फंसाने की कोशिश की जा रही है जबकि जिला चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी तथा अन्य अधिकारियों और चिकित्सकों, जो निलंबित हैं सभी के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। शासन की नीतियों के तहत उन्हें फंसाया जा रहा है। गुप्ता ने कहा कि जो भी दवाइयां खरीदी गई थी उनकी जांच नहीं की गई थी। मरीजों को अच्छी कंपनी की दवाइयां नहीं दी गई। यदि अच्छी कंपनी की दवाइयां दी जाती तब इस घटना को रोका जा सकता था। डाक्टर केवल देखकर यह नहीं बता सकता है कि दवा असली है कि नकली। दवाइयों का परीक्षण के बाद ही इसे चिकित्सक को दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रशासन स्वयं को बचाने के लिए उन्हें फंसा रहा है जबकि प्रशासन भी बराबर का दोषी है। उन्होंने बताया कि एक लेप्रोस्कोपिक मशीन 27 साल पुरानी है तथा एक मशीन चार वर्ष पुरानी है। हांलकि मशीन के रखरखाव को लेकर पूरा ध्यान रखा जाता है।
राज्य के बिलासपुर जिले के सकरी (पेंडारी) गांव में बीते शनिवार को एक निजी अस्पताल में शासकीय परिवार कल्याण स्वास्थ्य शिविर में 83 महिलाओं का नसंबदी आपरेशन किया गया था। महिलाओं ने उल्टी और सिरदर्द की शिकायत की तब उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया। बाद में अस्पताल में 12 महिलाओं की मौत हो गई। वहीं जिले के पेंडरा क्षेत्र में नसबंदी के बाद एक आदिवासी महिला की मौत हो गई है। राज्य में नसबंदी के बाद तबीयत बिगड़ने के कारण अभी तक 13 महिलाओं की मौत हुई है। राज्य शासन ने इस मामले में स्वास्थ्य विभाग के चार वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ निलंबन और इनमें से एक सरकारी डॉक्टर गुप्ता के खिलाफ निलंबन सहित आपराधिक प्रकरण (एफआईआर) दर्ज कराने की कार्रवाई की है और उन्हें स्वास्थ्य सेवाओं के संचालक को पद से हटा दिया गया है। मृतक महिलाओं के परिवारों को चार-चार लाख रूपए तथा बीमार महिलाओं को नि:शुल्क इलाज के साथ पचास-पचास हजार रूपए की मदद की घोषणा की गई है।

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