राजनीति की विसात पर वंश की बेल

राजनीति की विसात पर वंश की बेल

वंशवाद को लेकर राजनीतिक दल अक्सर एक दूसरे पर आरोप लगाते रहते हैं लेकिन जब चुनाव आते हैं तो कुनबे का असर हर राजनीतिक दल पर नजर आता है। छत्तीसगढ़ में हो रहे विधानसभा चुनाव भी इससे अछूते नहीं हैं और राजनीतिक दलों के टिकट वितरण में कुनबा साफ तौर पर हावी है।

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राज्य में सत्ता हासिल करने के लिए कांग्रेस अपने प्रचार में कोई कसर नहीं छोड़ रही है। राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी का दावा है कि पार्टी अपने दम पर बहुमत प्राप्त कर सरकार बनाएगी। महत्वपूर्ण बात यह है कि जोगी को पार्टी ने उम्मीदवार नहीं बनाया है। उनकी परंपरागत सीट मरवाही से उनके पुत्र अमित जोगी को और कोटा विधानसभा सीट से उनकी पत्नी रेणु जोगी को टिकट दिया गया है। खुद को पार्टी का अनुशासित सिपाही बताने वाले जोगी ने वंशवाद या कुनबे के बारे में कहा कि कांग्रेस इस पर कभी अमल नहीं करती। टिकट देने से पहले कई पहलुओं को देखा जाता है।
कांग्रेस का टिकट पार्टी के उन तीन वरिष्ठ नेताओेंं के करीबी रिश्तेदारों को भी मिला जो 23 मई को जीरम घाटी में हुए नक्सली हमले में मारे गये थे। हमले में मारे गए तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नंद कुमार पटेल के पुत्र उमेश पटेल खरसिया विधानसभा सीट से कांग्रेस के उम्मीदवार हैं। इसी हमले में मारे गए पूर्व विधायक विजय मुदलियार की पत्नी अलका मुदलियार को कांग्रेस ने राजनांदगांव से उम्मीदवार बनाया है जबकि दिवंगत नेता महेन््रद कर्मा की पत्नी देवती कर्मा को दंतेवाड़ा सुरक्षित सीट से टिकट दिया गया है। कुनबा हावी होने की बात खारिज करते हुए अलका कहती हैं कि अपने पति के अधूरे कामों को पूरा करना मेरी जिम्मेदारी है। इसे कोई परिवारवाद कहे या वंशवाद, मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता। पार्टी ने मुझे कुछ सोच समझ कर ही टिकट दिया है।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मोतीलाल वोरा छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस अभियान समिति के प्रमुख बनाये गये हैं। वोरा के पुत्र अरुण वोरा दुर्ग सीट से प्रत्याशी हैं। अविभाजित मध्यप्रदेश के दिवंगत मुख्यमंत्री श्यामाचरण शुक्ल के पुत्र अमितेश शुक्ल अपने पिता की सीट राजिम से कांग्रेस के उम्मीदवार हैं।
छत्तीसगढ़ में बीते दो चुनावों में बहुमत पा कर सत्ता हासिल करने वाली भाजपा भी कुनबे के असर से नहीं बच पाई। चं्रदपुर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के टिकट पर पार्टी के प्रदेश संसदीय सचिव युद्धवीर सिंह चुनाव लड़ रहे हैं जो उसके दिवंगत नेता और पूर्व कें्रदीय मंत्री दिलीप सिंह जूदेव के पुत्र हैं।
युद्धवीर दूसरी बार चुनाव मैदान में हैं। जशपुर राजघराने के सदस्य युद्धवीर को पिछली बार अपने पिता की लोकप्रियता का पूरा फायदा मिला था। इस बार उन्हें पिता के निधन से उपजी सहानुभूति के उनके पक्ष में वोटों में तब्दील होने की उम्मीद है। जूदेव के प्रति लोगों में गहरी श्रद्धा और सम्मान है।
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की भतीजी करूणा शुक्ला की गिनती कभी राज्य में भाजपा के वरिष्ठ नेताओं में होती थी। लेकिन यहां भाजपा की सरकार बनने के बाद उनकी पूछ परख कम हो गई और इस वर्ष चुनाव से पहले उन्होंने पार्टी ही छोड़ दी।

 

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